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गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाओं को कौन-कौन से टीके लगाये जाते हैं और ये टीके कब लगाये जाते हैं?
गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाओं को गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान जलà¥à¤¦à¥€ से जलà¥à¤¦à¥€ टिटनेस टॉकà¥à¤¸à¤¾à¤‡à¤¡ (टीटी) के दो टीके लगाये जाने चाहिà¤à¥¤
इन टीकों को टीटी-1 à¤à¤µà¤‚ टीटी-2 कहा जाता है। इन दोनो टीकों के बीच 4 सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ का अंतर रखना आवषà¥à¤¯à¤• है। यदि गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला पिछले 3 वरà¥à¤· मेंं टीटी के 2 टीके लगवा चà¥à¤•ी है तो उसे इस गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान केवल बूसà¥à¤Ÿà¤° टीटी का टीका ही लगवाया जाना चाहिये।
गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाओं के लिये टीकाकरण की आवषà¥à¤¯à¤•ता कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ होती है?
टीटी वैकà¥à¤¸à¥€à¤¨ सà¤à¥€ गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिलाओं को दिये जाने से उनका व उनके बचà¥à¤šà¥‡ का टिटनेस रोग से बचाव होता है। टिटनेस नवजात षिषà¥à¤†à¥‡à¤‚ के लिये à¤à¤• जानलेवा रोग है। जिससे उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ जकड़न, मांसपेषियों में गंà¤à¥€à¤° à¤à¥‡à¤‚ठन हो जाती है। कà¤à¥€-कà¤à¥€ पसलियों में जकड़न के कारण षिषॠसांस नही ले पाते हैं और इसी कारण उनकी मà¥à¤¤à¥à¤¯à¥ à¤à¥€ हो जाती है।
यदि गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला गरà¥à¤à¤¾à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ के दौरान देर से अपना नाम दरà¥à¤œ कराती है (ANC Registration) तब à¤à¥€ कà¥à¤¯à¤¾ उसे टीटी के टीके लगाये जाने चाहिये।
जी हाà¤, टीटी का टीका माठऔर बचà¥à¤šà¥‡ को टिटनेस की बीमारी से बचाता है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ में नवजात षिषà¥à¤“ं की मृतà¥à¤¯à¥ का à¤à¤• पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कारण जनà¥à¤® के समय टिटनेस का संकà¥à¤°à¤®à¤£ होना है। इसलिठअगर गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला ANC के लिठदेर से à¤à¥€ नाम दरà¥à¤œ करवाये तो à¤à¥€ उसे टीटी के टीके लगाये जाने चाहिये। किनà¥à¤¤à¥ टीटी-2 या टीटी बूसà¥à¤Ÿà¤° टीका पà¥à¤°à¤¸à¤µ की अनà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ तिथि से कम से कम चार सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ पहले दिया जाना चाहिये ताकि उसे उसका पूरा लाठमिल सके।
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